बहुत से फाउंडर्स सोचते हैं:
“अगर कस्टमर्स हमें छोड़ रहे हैं, तो हमारा प्रोडक्ट खराब होगा।”
लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।
कई बार कस्टमर्स संतुष्ट होने के बावजूद भी दूसरे ब्रांड्स या प्रोडक्ट्स ट्राय करते हैं।
क्यों?
क्योंकि इंसानों को नैचुरली पसंद होती हैं:
• नई चीज़ें
• नए अनुभव
• ज़्यादा एक्साइटमेंट
• सोशल ट्रेंड्स
• जिज्ञासा
कई बार कस्टमर्स सिर्फ इसलिए कॉम्पिटिटर्स को ट्राय करते हैं क्योंकि:
“मार्केट में कुछ नया आया है।”
इसका मतलब है कि रिटेंशन सिर्फ सैटिस्फैक्शन पर निर्भर नहीं करता।
यह इन चीज़ों पर भी निर्भर करता है:
• आदत
• इमोशनल कनेक्शन
• रूटीन
• कन्वीनियंस
• स्विच करने की कठिनाई
सबसे मजबूत प्रोडक्ट्स वही होते हैं जो लोगों की रोज़मर्रा की आदत का हिस्सा बन जाते हैं।
जैसे:
• Google Maps
• Amazon
लोग इन्हें बिना सोचे-समझे अपने आप इस्तेमाल करते हैं।
इसे कहते हैं — प्रोडक्ट स्टिकिनेस।
जब किसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल आदत बन जाता है, तब उसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है।
इसीलिए फाउंडर्स को इन चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए:
• मजबूत ऑनबोर्डिंग
• डेली यूसेज पैटर्न
• कस्टमर एंगेजमेंट
• इमोशनल कनेक्शन
• वर्कफ्लो इंटीग्रेशन
एक और महत्वपूर्ण गलती:
बहुत ज़्यादा डिस्काउंट्स और ऑफर्स देने से कस्टमर्स बार-बार स्विच करने की आदत डाल लेते हैं।
अगर कस्टमर्स हमेशा ऑफर्स के पीछे भागेंगे, तो लॉयल्टी कमजोर हो जाएगी।
लक्ष्य सिर्फ यह नहीं होना चाहिए:
“कस्टमर्स को खुश बनाना।”
असली लक्ष्य होना चाहिए:
“प्रोडक्ट को उनकी रोज़मर्रा की आदत का हिस्सा बनाना।”
क्योंकि लोग उन प्रोडक्ट्स को बहुत कम छोड़ते हैं जो उन्हें परिचित, आसान और इमोशनली जुड़े हुए लगते हैं।
