आपकी टीम अंडरपरफॉर्म नहीं कर रही, आपकी एक्सपेक्टेशन्स इनविज़िबल हैं।
बहुत सारे बिज़नेस ओनर्स अक्सर एक ही शिकायत करते हैं।
“मेरी टीम अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही।”
“एम्प्लॉईज़ ओनरशिप नहीं लेते।”
“किसी में अकाउंटेबिलिटी नहीं है।”
लेकिन टीम को दोष देने से पहले खुद से एक सवाल पूछिए।
क्या आपने कभी स्पष्ट रूप से बताया है कि अच्छी परफॉर्मेंस दिखती कैसी है?
क्योंकि सच्चाई यह है कि जिस परिणाम को कभी स्पष्ट रूप से परिभाषित ही नहीं किया गया, उसके लिए किसी व्यक्ति को जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता।
हायरिंग करना आसान है, लेकिन रोल्स को डिफाइन करना मुश्किल है
अक्सर बिज़नेस में जैसे ही कोई ज़रूरत पैदा होती है, तुरंत किसी व्यक्ति को हायर कर लिया जाता है।
सेल्स बढ़ रही है, तो एक सेल्सपर्सन रख लिया।
मार्केटिंग का काम बढ़ रहा है, तो एक ग्राफिक डिज़ाइनर रख लिया।
ऑपरेशन्स संभालना मुश्किल हो रहा है, तो एक एग्जीक्यूटिव रख लिया।
लेकिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल कभी पूछा ही नहीं जाता।
आखिर इस व्यक्ति को करना क्या है?
- ना कोई स्पष्ट जॉब प्रोफाइल होती है।
- ना कोई जॉब डिस्क्रिप्शन होता है।
- ना कोई तय ज़िम्मेदारियाँ होती हैं।
- ना कोई मापने योग्य एक्सपेक्टेशन्स होती हैं।
बस ज़रूरत के हिसाब से काम दिया जाता रहता है।
और धीरे-धीरे यही कन्फ्यूज़न कंपनी की वर्किंग कल्चर बन जाता है।
जब एक्सपेक्टेशन्स इनविज़िबल होती हैं, तो कन्फ्यूज़न होना तय है
यहीं से समस्याएँ शुरू होती हैं।
कई बार एक ही काम तीन लोग कर रहे होते हैं।
और कई बार कोई भी नहीं कर रहा होता, क्योंकि सभी को लगता है कि कोई दूसरा व्यक्ति कर देगा।
लोग प्रॉएक्टिव तरीके से काम करने की बजाय सिर्फ़ रिएक्टिव तरीके से काम करने लगते हैं।
दिनभर सभी व्यस्त दिखाई देते हैं, लेकिन महीने के अंत में जब पूछा जाता है,
“इस महीने आपने क्या हासिल किया?”
तो किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं होता।
इसलिए नहीं कि उनमें क्षमता नहीं है।
बल्कि इसलिए क्योंकि किसी ने उन्हें बताया ही नहीं कि सफलता दिखती कैसी है।
एक छोटा सा उदाहरण
मान लीजिए किसी ग्राफिक डिज़ाइनर को सिर्फ इतना कहा जाता है।
“कुछ डिज़ाइन्स बना दो।”
लेकिन कोई यह नहीं बताता कि,
• इसका उद्देश्य क्या है?
• यह किस ऑडियंस के लिए है?
• इसे कहाँ इस्तेमाल किया जाएगा?
• इससे हम कौन सा परिणाम चाहते हैं?
• एक अच्छा डिज़ाइन आखिर दिखेगा कैसा?
जब स्पष्टता नहीं होती, तो लोग अपनी तरफ़ से अनुमान लगाते हैं।
और अनुमान हमेशा दोबारा काम, देरी, निराशा और गलतफहमियाँ पैदा करते हैं।
इसका असर सिर्फ़ प्रोडक्टिविटी पर नहीं पड़ता
धीरे-धीरे इसका असर लोगों के मनोबल पर भी पड़ता है।
उनका कॉन्फिडेंस कम होने लगता है।
ओनरशिप खत्म होने लगती है।
वे खुद पर संदेह करने लगते हैं।
और धीरे-धीरे नई पहल करना भी बंद कर देते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए।
फिर मैनेजमेंट उन्हें “अंडरपरफॉर्मर” का टैग दे देती है।
जबकि कई बार समस्या व्यक्ति में नहीं होती।
समस्या सिस्टम की अनुपस्थिति में होती है।
हर रोल को चार सवालों के जवाब पता होने चाहिए
आपकी कंपनी के हर व्यक्ति को यह चार बातें स्पष्ट होनी चाहिए।
1. मेरी ज़िम्मेदारी क्या है?
2. मुझे रोज़, साप्ताहिक और मासिक कौन से काम करने हैं?
3. मेरी परफॉर्मेंस किस आधार पर मापी जाएगी?
4. मेरे रोल से किस परिणाम की अपेक्षा की जाती है?
अगर इन चार सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, तो परफॉर्मेंस की चर्चा हमेशा भावनाओं पर आधारित होगी, तथ्यों पर नहीं।
अनुमान के भरोसे बिज़नेस नहीं बढ़ते
बिज़नेस अनुमान के भरोसे नहीं बढ़ते।
लोग बिना दिशा के अच्छा काम नहीं कर सकते।
और स्पष्टता के बिना अकाउंटेबिलिटी कभी पैदा नहीं होती।
अगर आपको एक हाई परफॉर्मिंग टीम बनानी है, तो बेहतर परफॉर्मेंस माँगने से शुरुआत मत कीजिए।
बेहतर एक्सपेक्टेशन्स तय करने से शुरुआत कीजिए।
क्योंकि हो सकता है कि आपकी टीम अंडरपरफॉर्म नहीं कर रही हो।
आपकी एक्सपेक्टेशन्स ही इनविज़िबल हों।
और इनविज़िबल एक्सपेक्टेशन्स हमेशा बिज़नेस के अंदर विज़िबल समस्याएँ पैदा करती हैं।
