आपके बिज़नेस को ज़्यादा एम्प्लॉईज़ नहीं, बल्कि टीम के अंदर ज़्यादा ओनर्स चाहिए
क्या आप जानते हैं?
गैलप की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में केवल २०% एम्प्लॉईज़ ही अपने काम के साथ वास्तव में जुड़े हुए महसूस करते हैं। यानी ५ में से ४ लोग सिर्फ अपना काम पूरा कर रहे हैं, लेकिन बिज़नेस की सफलता से पूरी तरह जुड़े हुए नहीं हैं।
इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसी टीम की एंगेजमेंट और परफ़ॉर्मेंस में लगभग ७०% अंतर उसके मैनेजर्स और लीडर्स की वजह से आता है।
और यही वह जगह है जहाँ आज बहुत सारे छोटे और मध्यम व्यवसाय पीछे रह जाते हैं।
एम्प्लॉईज़ काम कर रहे हैं, लेकिन कोई काम का मालिक नहीं बन रहा
बहुत सारी ऑर्गेनाइज़ेशन्स में एम्प्लॉईज़ सुबह आते हैं, अपना ९ से ५ का काम पूरा करते हैं और फिर घर चले जाते हैं।
इसमें कोई बुराई नहीं है।
समस्या तब शुरू होती है जब कोई इनिशिएटिव नहीं लेता, कोई प्रॉब्लम सॉल्व नहीं करता और कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं लेता।
जैसे ही कोई समस्या आती है, ब्लेम गेम शुरू हो जाता है।
जैसे ही कोई डिसीज़न लेना होता है, सब इंस्ट्रक्शन्स का इंतज़ार करने लगते हैं।
और धीरे-धीरे हर डिपार्टमेंट फाउंडर पर डिपेंडेंट हो जाता है।
बिज़नेस को अच्छे एम्प्लॉईज़ नहीं, बल्कि इंटरनल ओनर्स चाहिए
बहुत सारे बिज़नेस ओनर्स कहते हैं,
"मुझे अच्छे एम्प्लॉईज़ चाहिए।"
लेकिन सच यह है कि बिज़नेस को सिर्फ एम्प्लॉईज़ नहीं, बल्कि ऐसे लोग चाहिए जो ओनर्स की तरह सोचें।
यहाँ ओनर का मतलब पद से नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी से है।
ऐसे लोग जो खुद से पूछें:
• इस प्रोसेस को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है?
• इस समस्या का समाधान जल्दी कैसे निकले?
• मेरे डिपार्टमेंट की परफ़ॉर्मेंस कैसे बढ़े?
• मैं बिना इंस्ट्रक्शन्स का इंतज़ार किए क्या कर सकता हूँ?
यही लीडरशिप बिहेवियर है।
अगर ऐसे लोग नहीं होंगे, तो हर छोटा-बड़ा डिसीज़न आखिर में फाउंडर के पास ही आएगा।
और वहीं से ग्रोथ धीमी पड़ने लगती है।
फाउंडर हमेशा हर डिपार्टमेंट नहीं चला सकता
बहुत सारे फाउंडर्स अनजाने में एक साथ कई भूमिकाएँ निभाने लगते हैं।
• हेड ऑफ सेल्स
• हेड ऑफ ऑपरेशन्स
• हेड ऑफ एचआर
• हेड ऑफ फ़ाइनेंस
• हेड ऑफ कस्टमर सपोर्ट
शुरुआत में यह मॉडल काम करता है।
लेकिन जैसे-जैसे बिज़नेस बढ़ता है, फाउंडर पर बोझ बढ़ता जाता है, टीम डिपेंडेंट हो जाती है और एग्ज़ीक्यूशन धीमा होने लगता है।
फिर एक वाक्य हर जगह सुनाई देता है:
"फाउंडर के बिना कुछ आगे नहीं बढ़ता।"
यह किसी मज़बूत बिज़नेस की निशानी नहीं है।
यह इस बात का संकेत है कि बिज़नेस में मिडिल मैनेजमेंट की मज़बूत लेयर मौजूद नहीं है।
ऑर्गेनाइज़ेशन्स को क्या करना चाहिए?
सिर्फ नए लोगों को हायर करने के बजाय, टीम के अंदर लीडर्स तैयार करने पर काम करना चाहिए।
इसके लिए:
• सिर्फ टास्क्स नहीं, ओनरशिप डेलीगेट करें।
• एम्प्लॉईज़ को छोटे-छोटे डिसीज़न्स लेने का अधिकार दें।
• उन्हें महसूस कराएँ कि वे बिज़नेस का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
• इंफॉर्मेशन खुले तौर पर शेयर करें।
• लीडरशिप का मतलब और एक्सपेक्टेशन्स स्पष्ट करें।
• अकाउंटेबिलिटी और इनिशिएटिव को प्रोत्साहित करें।
लोग अपने आप लीडर्स नहीं बनते।
ऑर्गेनाइज़ेशन्स को उन्हें जानबूझकर लीडर बनाना पड़ता है।
कोई बिज़नेस ज़्यादा एम्प्लॉईज़ रखने से स्केलेबल नहीं बनता।
वह तब स्केलेबल बनता है जब उसके अंदर ज़िम्मेदारी लेने वाले लोग तैयार होते हैं।
क्योंकि एक फाउंडर कंपनी शुरू कर सकता है,
लेकिन एक मज़बूत लीडरशिप टीम ही उसे लंबे समय तक आगे बढ़ा सकती है।
